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वायनाड में बंदर और जंगली सूअर मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुख्य कारण
कन्नूर विश्वविद्यालय और जिनेवा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के तीन साल के वैज्ञानिक अध्ययन में पता चला कि वायनाड के ग्रामीण इलाकों में बंदर मानव-वन्यजीव विरोध की सबसे बड़ी समस्या हैं। इसके बाद जंगली सूअरों का स्थान आता है।
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वायनाड जिले में वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच संघर्ष की गंभीर समस्या को लेकर किए गए एक व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षण में बंदरों को सर्वाधिक समस्याग्रस्त प्रजाति के रूप में चिह्नित किया गया है। कन्नूर विश्वविद्यालय और जिनेवा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा 49 गांवों में तीन वर्षों तक संचालित इस अध्ययन में पाया गया कि स्थानीय निवासियों द्वारा बंदरों के साथ सर्वाधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं।
शोध में यह भी उजागर हुआ कि जंगली सूअर मानव-वन्यजीव विरोध के दूसरे प्रमुख कारण हैं। इन दोनों प्रजातियों के साथ होने वाली घटनाओं की संख्या अन्य वन्यजीवों की तुलना में काफी अधिक है।
वायनाड जिला केरल के सर्वाधिक वन-संपन्न क्षेत्रों में से एक है और यहां की ग्रामीण आबादी कृषि कार्यों के लिए आंशिक रूप से वन संसाधनों पर निर्भर है। इस कारण कृषि भूमि और वन क्षेत्रों के बीच की सीमा में रहने वाली वन्यजीव प्रजातियों के साथ संघर्ष की स्थिति बनी रहती है।
यह अध्ययन स्थानीय प्रशासन और वन संरक्षण एजेंसियों के लिए मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए लक्षित हस्तक्षेप योजनाएं बनाने में सहायक साबित हो सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय समुदाय को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।