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महिला निःशुल्क यात्रा योजना को असंवैधानिक घोषित करने की मांग
निजी बस संचालक ने मद्रास उच्च न्यायालय में सरकारी बसों में महिलाओं के लिए निःशुल्क यात्रा योजना को चुनौती दी है। वह दावा करता है कि यह योजना उसके व्यवसाय को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी।
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इरोड के एक निजी बस संचालक ने मद्रास उच्च न्यायालय में 'वेत्त्री पयानम' योजना को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। यह योजना सरकारी बसों में महिलाओं को निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान करती है।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया है कि इस योजना से केवल सरकारी बसों को ही नुकसान नहीं होगा, बल्कि निजी बस ऑपरेटरों को भी गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। उसका तर्क है कि महिला यात्रियों के लिए निःशुल्क किराया प्रणाली से व्यवसायिक राजस्व में भारी गिरावट आएगी, जिससे निजी बस सेवाओं को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
बस संचालक का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन के लिए सभी स्टेकहोल्डरों को समान रूप से जिम्मेदारी साझा करनी चाहिए। निजी क्षेत्र को प्रतिस्पर्धा में बराबरी का मौका न देकर योजना एक पक्षीय है।
यह मामला सार्वजनिक कल्याण योजनाओं और निजी व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन के प्रश्न को उजागर करता है। न्यायालय के निर्णय का क्षेत्र की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।