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छात्र नेता नेहा बोरा ने कहा- एनटीए और नई शिक्षा नीति से निजी कोचिंग को ही लाभ
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आलोचना करते हुए छात्र नेता नेहा बोरा ने कहा कि इन सुधारों से केवल निजी कोचिंग संस्थानों को ही फायदा मिला है। उनके अनुसार इन नीतियों के कारण सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली और सामान्य छात्रों को नुकसान हुआ है।
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छात्र आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक नेहा बोरा ने शिक्षा क्षेत्र में किए गए हालिया सुधारों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (नेप) की मौजूदा व्यवस्था को निजी कोचिंग उद्योग को बढ़ावा देने वाली बताया है।
बोरा का तर्क है कि इन नीतियों के क्रियान्वयन से एकेडमिक परिदृश्य में एक विषम परिस्थिति सामने आई है। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को प्रतিस्पर्धा में पिछड़ना पड़ रहा है, जबकि निजी कोचिंग संस्थान बड़े पैमाने पर विस्तार कर रहे हैं।
छात्र नेता के अनुसार, वर्तमान परीक्षा प्रणाली और शिक्षा नीति को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कोचिंग के बिना प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होना मुश्किल हो गया है। इससे शिक्षा की बुनियादी संरचना को नुकसान पहुंच रहा है और समाज में शिक्षा असमानता बढ़ रही है।
बोरा ने इन मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए व्यापक छात्र जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। वे मानती हैं कि शिक्षा प्रणाली में सुधार केवल तभी संभव है जब सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों को मजबूत किया जाए और सभी छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।