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रक्षा निविदाओं में निजी कंपनियों का हिस्सा बढ़कर 56 प्रतिशत हुआ
भारत में रक्षा क्षेत्र की सरकारी निविदाओं में निजी कंपनियों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 2019 में जहां निजी रक्षा फर्मों का हिस्सा महज 3 प्रतिशत था, वह 2026 तक बढ़कर 56 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
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भारतीय रक्षा क्षेत्र में निजी उद्यमों की भूमिका में तेजी से विस्तार हो रहा है। सरकारी निविदा प्रक्रियाओं में निजी रक्षा कंपनियों की भागीदारी पिछले सात वर्षों में नाटकीय रूप से बढ़ी है, जो सरकार की रक्षा विनिर्माण को निजी क्षेत्र में स्थानांतरित करने की रणनीति को दर्शाता है।
2019 में जब निजी कंपनियों का योगदान मात्र 3 प्रतिशत था, तब से उनकी हिस्सेदारी में लगातार वृद्धि पाई गई है। 2026 तक यह आंकड़ा 56 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जो रक्षा उद्योग के स्वरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है।
इस प्रवृत्ति का कारण भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' नीति और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता में निहित है। सरकार निजी औद्योगिक क्षेत्र को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करके प्रौद्योगिकीय उन्नति और उत्पादन क्षमता में वृद्धि लाना चाहती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव रक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करेगा, नई तकनीकों का विकास करेगा और देश की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा। साथ ही, निजी कंपनियों की भागीदारी से रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।