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पार्क और भूमि प्रबंधन संशोधन के विरुद्ध विशेषज्ञों का विरोध
देश के प्रख्यात विशेषज्ञ, पूर्व नौकरशाहों और राजनेताओं ने पार्कों और भूमि प्रबंधन कानूनों में प्रस्तावित संशोधनों का विरोध करते हुए राज्यपाल को पत्र लिखा है। विरोधकर्ताओं का मानना है कि ये संशोधन पर्यावरण और सार्वजनिक हित के लिए हानिकारक साबित होंगे।
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नीति निर्माण में दशकों का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों, सेवानिवृत्त प्रशासकों और राजनीतिज्ञों ने संयुक्त रूप से राज्यपाल को संबोधित एक पत्र तैयार किया है जिसमें पार्कों से संबंधित और भूमि प्रबंधन कानून तथा अधिकार (बीएमएलटीए) संशोधनों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।
इन हस्ताक्षरकर्ताओं का तर्क है कि प्रस्तावित संशोधन मौजूदा सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा को कमजोर करेंगे और नागरिकों के लिए हरित क्षेत्रों तक पहुंच को प्रभावित करेंगे। उनके अनुसार, ये कदम शहरी पर्यावरण और जनता के स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालीन परिणाम दे सकते हैं।
विरोधकारियों का कहना है कि सरकार को इस तरह के महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले व्यापक सार्वजनिक परामर्श और विशेषज्ञ समीक्षा का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल से अपील की है कि वह इन संशोधनों पर पुनर्विचार के लिए सभी हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा करवाएं।
यह विरोध पत्र शहरी नीति और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभिन्न विचारधाराओं के लोगों के बीच एक सुदृढ़ सर्वसम्मति को दर्शाता है।