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संपत्ति बिक्री में किराएदार के अधिकार: क्या नया मालिक तुरंत निकाल सकता है?
जब किराए वाला मकान किसी अन्य व्यक्ति को बेचा जाता है, तो किराएदार को तुरंत खाली करना अनिवार्य नहीं है। भारतीय कानून किराएदारों को संपत्ति हस्तांतरण के बाद भी सुरक्षा प्रदान करता है।
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जब कोई मकान मालिक अपनी किराए की संपत्ति किसी दूसरे व्यक्ति को बेचता है, तो कई किराएदार यह सोचते हैं कि नए मालिक उन्हें तुरंत मकान खाली करने के लिए कह सकते हैं। हालांकि, भारतीय कानून इस संबंध में किराएदारों को महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है।
स्थानांतरण संपत्ति अधिनियम की धारा 109 के तहत, जब कोई संपत्ति बिक्री के माध्यम से हस्तांतरित होती है, तो नया मालिक पुरानी किराया समझौते से बंधा होता है। इसका अर्थ है कि नया मालिक पूर्ववर्ती समझौते और उसकी शर्तों का पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। किराएदार को तुरंत मकान खाली करने का आदेश नहीं दिया जा सकता, बशर्ते वह नियमित रूप से किराया दे रहा हो और समझौते की शर्तों का पालन कर रहा हो।
नए मालिक के पास किराएदार को निकालने के लिए कानूनी कारण होने चाहिए, जैसे किराया न देना या मकान का अनुचित उपयोग। मकान बिक्री का तथ्य स्वयं में निष्कासन का कारण नहीं बनता। किराएदार को उचित कानूनी नोटिस दिए बिना और न्यायालय के आदेश के बिना निष्कासित नहीं किया जा सकता।
किराएदारों को सलाह दी जाती है कि यदि संपत्ति बिकने की स्थिति में नए मालिक के साथ अपने अधिकारों की पुष्टि करें और पुरानी किराया समझौते की प्रति सुरक्षित रखें। विभिन्न राज्यों में किराया नियंत्रण कानून अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय कानूनी सलाह लेना उचित है।