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कजलहेरी अभयारण्य: जहरीले पानी से कछुओं का पलायन

कजलहेरी में संरक्षित जलीय प्रजातियां विषाक्त जल के कारण अपना आवास छोड़ रही हैं। ये कछुए भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 के तहत बाघ और गैंडे जैसी सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त हैं।

LSN India · 5 September 2026

कजलहेरी अभयारण्य: जहरीले पानी से कछुओं का पलायन

कजलहेरी अभयारण्य, जो कभी कछुओं के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता था, अब उनके लिए खतरनाक बन गया है। अभयारण्य के जल में बढ़ते प्रदूषण के कारण ये दुर्लभ प्रजातियां अपना प्राकृतिक आवास छोड़कर जा रही हैं।

यहां पाई जाने वाली कछुओं की प्रजातियां वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची-1 के तहत सूचीबद्ध हैं, जो उन्हें बाघ और गैंडे के समान उच्चतम कानूनी संरक्षण प्रदान करती है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की लाल सूची में भी ये प्रजातियां संकटग्रस्त श्रेणी में दर्ज हैं।

जल की गुणवत्ता में गिरावट से जुड़े इस मुद्दे ने संरक्षणवादियों और वन्यजीव प्रबंधकों के बीच गंभीर चिंता पैदा की है। विषाक्त जल न केवल कछुओं के जीवन को सीधे खतरे में डालता है, बल्कि उनके भोजन और प्रजनन चक्र को भी प्रभावित करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अभयारण्य को पुनः सुरक्षित आवास में परिणत करने के लिए तत्काल उपचारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। जल प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना और उन्हें नियंत्रित करना इन संकटग्रस्त प्रजातियों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।