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बढ़ती ब्याज दरों के बीच सरकारी कंपनियों ने बांड जारी करने की योजना रद्द की
बाजार में बढ़ती अल्पकालीन ब्याज दरों के कारण आरईसी ने तीन हजार करोड़ रुपये का दो साल वाला बांड जारी करने की योजना वापस ली है। इससे पहले पीएफसी ने भी ढाई हजार करोड़ रुपये का तीन साल वाला बांड निर्गम रद्द किया था।
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अल्पकालीन बांड पर बढ़ती ब्याज दरों के कारण भारत के प्रमुख सरकारी उद्यम अपने पूंजी जुटाने की योजनाएं स्थगित कर रहे हैं। पुनर्नवीकरण विकास निगम (आरईसी) ने इस सप्ताह ₹3,000 करोड़ की तीन साल की बांड योजना रद्द कर दी है।
आरईसी की यह कार्रवाई पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) के बाद हुई है, जिसने इसी हफ्ते अपने ₹2,500 करोड़ के तीन साल के बांड निर्गम को वापस ले लिया था। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों की ओर से बांड पर अधिक प्रीमियम की मांग ने इन सार्वजनिक उद्यमों को अपनी योजनाएं स्थगित करने के लिए प्रेरित किया है।
सरकारी कंपनियों के बांड को आमतौर पर कम जोखिम माना जाता है, लेकिन बढ़ती ब्याज दरों का माहौल निवेशकों को उच्च रिटर्न की मांग करने के लिए प्रेरित कर रहा है। ऐसी परिस्थिति में, उधार लेने वाली संस्थाओं के लिए बांड जारी करना आर्थिक रूप से अव्यावहारिक हो गया है।
यह कदम बाजार की गतिशील परिस्थितियों के अनुरूप निवेश निर्णय लेने की रणनीति को दर्शाता है। आने वाले समय में यदि ब्याज दरें अनुकूल हों तो ये कंपनियां अपनी बांड योजनाओं को पुनः सक्रिय कर सकती हैं।