World · India Bureau
सूचना का अधिकार: सरकारी विभागों में स्वैच्छिक प्रकटीकरण नियमों की अनदेखी
सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 के तहत सरकारी संस्थाओं को 16 प्रकार की जानकारी स्वैच्छिक रूप से सार्वजनिक करनी चाहिए, लेकिन इस प्रावधान का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।
LSN India ·

सूचना का अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन में गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिनियम की धारा 4 में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी सार्वजनिक प्राधिकार 16 निर्धारित श्रेणियों की जानकारी स्वेच्छा से जनता के सामने रखें। इनमें संगठन की संरचना, कार्यप्रणाली, नीतियां और निर्णय प्रक्रिया संबंधी विवरण शामिल हैं।
हालांकि, देश भर के विभिन्न सरकारी विभागों में इस स्वैच्छिक प्रकटीकरण की प्रवृत्ति बहुत कमजोर देखी गई है। अधिकांश प्राधिकार केवल सूचना अधिकार के तहत आवेदन प्राप्त होने पर ही जानकारी साझा करते हैं, स्वयं से पहल नहीं करते। यह व्यवहार पारदर्शिता के सिद्धांत के विपरीत है और सूचना के अधिकार को कमजोर बनाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वैच्छिक प्रकटीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकारी संस्थाओं को व्यवस्थित निर्देश और नियमित निरीक्षण की आवश्यकता है। इसके अलावा, शिकायत निवारण तंत्र को भी मजबूत किया जाना चाहिए ताकि नियमों का पालन न करने वाले प्राधिकारों को जवाबदेह बनाया जा सके।
शासन में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर पर सूचना आयोगों को धारा 4 के सही कार्यान्वयन पर जोर देना होगा। सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य ही नागरिकों को सशक्त बनाना है, जिसे केवल स्वैच्छिक प्रकटीकरण के माध्यम से ही पूरी तरह हासिल किया जा सकता है।