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पंजाब के नशा विरोधी कार्यकर्ता परवींदर सिंह झोता का अंतिम संस्कार
मंसा में गोली मारकर की गई हत्या के 26 दिन बाद पंजाब के प्रसिद्ध नशा विरोधी कार्यकर्ता परवींदर सिंह झोता का अंतिम संस्कार किया गया। झोता की मृत्यु से पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक उथल-पुथल मच गई है।
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पंजाब के मंसा जिले में नशीली दवाओं के खिलाफ अपनी सक्रिय लड़ाई के लिए ख्यात परवींदर सिंह झोता की हत्या के 26 दिन बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। झोता की मौत के आसपास की परिस्थितियों ने पूरे प्रदेश में व्यापक चिंता और आक्रोश का कारण बनी है।
झोता की गोली मारकर की गई हत्या को लेकर उनके परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से न्याय की मांग जोरों पर है। परिवार का आग्रह है कि राज्य सरकार नशा तस्करी के विरुद्ध अपने अभियान को तेज करे और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।
झोता की हत्या के बाद से पंजाब के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों ने मामले में पारदर्शी जांच की मांग की है और इस बात पर जोर दिया है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
झोता का नाम पंजाब में नशा विरोधी आंदोलन से जुड़ा हुआ था और वे स्थानीय समुदाय में अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते थे। उनकी अचानक और हिंसक मृत्यु ने प्रदेश में नशीली दवाओं की समस्या और इससे जुड़ी हिंसा के मुद्दों पर फिर से ध्यान केंद्रित किया है।