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पंजाब में नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ी, राजनीति तेज हुई
पंजाब सरकार की नशा विरोधी मुहिम को लेकर विपक्ष ने इसे प्रचार की विफलता बताया है। जबकि सरकार जब्ती और सजा दर में वृद्धि का दावा कर रही है।
LSN India ·
पंजाब में नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या में वृद्धि को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा संचालित नशा विरोधी अभियान को लेकर विपक्ष ने कड़ी आलोचना की है। विरोधी पक्ष का मानना है कि सरकार केवल संख्या पर ध्यान केंद्रित कर रही है और समस्या की गंभीरता को नजरअंदाज कर रही है।
सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि नशीली दवाओं की जब्ती में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, न्यायालय में सजा का दर 88-89 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। अधिकारियों का तर्क है कि ये आंकड़े सरकार की नशा विरोधी नीति की सफलता को दर्शाते हैं।
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि महज संख्या बढ़ना वास्तविक समस्या के समाधान का संकेत नहीं देता है। नशा मुक्ति केंद्रों की बढ़ती संख्या के बावजूद, जमीनी स्तर पर समस्या की गंभीरता में कमी नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल दमनकारी उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
इस बीच, राजनीतिक दलों के बीच मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी है। सरकार अपने कार्यक्रम की सफलता साबित करने के लिए आंकड़ों का हवाला दे रही है, जबकि विपक्ष जमीनी हकीकत की ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है। पंजाब में नशा मुक्ति पर राजनीतिक विवाद आने वाले दिनों में और तीव्र होने की संभावना है।