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पंजाब: 2027 चुनावों से पहले पराली जलाने की परंपरा जारी रहेगी
पंजाब में आने वाले विधानसभा चुनावों से महीनों पहले भी पराली जलाने की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं दिखाई दे रहा है। किसान परंपरागत तरीके से खेतों को साफ करते रहेंगे, जिससे राज्य में प्रदूषण का संकट बना रहेगा।
LSN India ·
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भी पराली जलाने की राजनीति पूर्ववत रहने की संभावना है। राज्य के किसान आने वाले कृषि सीजन में भी अपने खेतों की सफाई के लिए पारंपरिक तरीका अपनाते हुए पराली जलाते रहेंगे, जिससे वायु प्रदूषण की समस्या में कोई ख़ास कमी नहीं आएगी।
इस साल भी पराली जलाने की घटनाएं पिछले वर्षों जैसी ही रहने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि सरकारें समय-समय पर किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए नई नीतियां और प्रोत्साहन योजनाएं लागू करती रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव सीमित ही रहा है।
कृषि विशेषज्ञ और पर्यावरणविद् इस बात पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि जब तक पराली के समुचित प्रबंधन के लिए किसानों को आर्थिक सहायता और आधुनिक यंत्रों तक पहुंच नहीं मिलती, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। राज्य में शरद ऋतु में पराली जलने से दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत में गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति उत्पन्न होती है।
राजनीतिक दलों के लिए यह मुद्दा चुनावी महत्व का बना हुआ है, लेकिन किसानों और पर्यावरण दोनों के हित में कोई दीर्घकालीन समाधान अभी तक सामने नहीं आया है। विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनावों तक पराली प्रबंधन की यह जटिल समस्या पंजाब की राजनीति का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रहेगी।