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पंजाब सरकार पर पराली जलाने के मुद्दे पर जनता को भ्रमित करने का आरोप
पंजाब के एक प्रमुख राजनेता ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह पराली जलाने की समस्या को लेकर लोगों को गुमराह कर रही है। विशेषज्ञों और किसानों के बीच इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।
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पंजाब के एक प्रभावशाली नेता सिरसा ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि प्रशासन पराली जलाने की समस्या पर जनता को गलत सूचना दे रहा है। सिरसा के अनुसार, सरकार इस गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे के प्रति अपनी जिम्मेदारी से बच रही है और समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।
पराली जलाने की समस्या दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पंजाब और हरियाणा में किसानों द्वारा अक्टूबर-नवंबर के महीनों में गेहूं की बुवाई से पहले धान की पराली को जला दिया जाता है। यह प्रथा वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाती है।
सिरसा का मानना है कि राज्य सरकार को किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए। उनके अनुसार, पर्याप्त वित्तीय संसाधन और तकनीकी सहायता के अभाव में किसान पराली जलाने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने की प्रथा को समाप्त करने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है जिसमें किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार भी शामिल हो।