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पंजाब में नशे की समस्या 2027 के चुनाव का केंद्रीय मुद्दा बनी
पंजाब में नशीली दवाओं की समस्या यहां की राजनीति का अभिन्न हिस्सा बन गई है। विरोधी नशा कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोता की हत्या के बाद जनता के बीच भावनाओं का ज्वार उठ खड़ा हुआ है, जिसे आने वाले विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दल अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पंजाब में नशीली दवाओं की समस्या राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में बनी हुई है। यह मुद्दा राज्य की विकास और कानून-व्यवस्था संबंधी बहसों में प्रमुख स्थान रखता है, जिससे आम जनता के बीच व्यापक चिंता व्यक्त की जाती रही है।
हाल ही में एक प्रमुख नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोता की हत्या ने इस संवेदनशील विषय को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। इस घटना के बाद पंजाब में सार्वजनिक असंतोष की लहर दौड़ गई है और समाज के विभिन्न वर्गों में इस बारे में गहरी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए, विभिन्न राजनीतिक दल नशे की समस्या को अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बना रहे हैं। चुनाव से पहले इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि पार्टियां जनता की भावनाओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही हैं।
नशा-विरोधी अभियान को लेकर होने वाली राजनीतिक प्रतিस्पर्धा आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली है, जहां सभी दल इस मुद्दे पर अपनी मजबूत स्थिति प्रदर्शित करना चाहेंगे।