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पंजाब में भूजल दोहन से छोटे किसानों को नुकसान
पंजाब में अत्यधिक भूजल दोहन की प्रवृत्ति छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेती को अलाभकारी बना रही है। गहरे कुएं खोदने और बिजली की बढ़ती लागत से छोटे किसान कृषि छोड़ने के लिए विवश हो रहे हैं।
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पंजाब में भूजल संसाधनों का अनियंत्रित दोहन राज्य की कृषि व्यवस्था में गहरे संकट का कारण बन गया है। भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आ रही है, जिससे कुओं को गहरा खोदना पड़ रहा है। इससे सिंचाई की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो छोटे किसानों के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह साबित हो रही है।
छोटे और सीमांत किसान, जिनके पास सीमित आर्थिक संसाधन हैं, गहरे कुएं खोदने और रखरखाव के खर्च को वहन नहीं कर पा रहे हैं। बिजली की बढ़ती दरों के साथ-साथ सिंचाई का खर्च कुल उत्पादन लागत का एक बड़ा हिस्सा बन गया है। इस कारण छोटे किसानों की फसलें अलाभकारी होती जा रही हैं।
राज्य में बड़े किसानों की तुलना में छोटे किसानों की संख्या अधिक है, लेकिन भूजल दोहन की मौजूदा नीति उनके हितों की रक्षा नहीं कर रही है। इसके परिणामस्वरूप कई छोटे किसान खेती से विमुख हो रहे हैं और अपनी जमीन बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल के सतत् प्रबंधन और सिंचाई तकनीकों में सुधार के बिना पंजाब की कृषि का भविष्य गंभीर संकट में है। छोटे किसानों को आर्थिक सहायता और आधुनिक सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।