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पंजाब में भूजल संकट से बढ़ रहा सामाजिक और आर्थिक विषमता
पंजाब में 76.47 प्रतिशत भूजल खंड अत्यधिक दोहन की स्थिति में हैं, जो देश में सबसे अधिक है। गेहूं और चावल जैसी जल-गहन फसलों की खेती के लिए भूजल पर अत्यधिक निर्भरता किसानों की लागत बढ़ा रही है और भूमि धंसाव जैसी समस्याएं पैदा कर रही है।
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एक नए अध्ययन से पता चलता है कि पंजाब में भूजल का अत्यधिक दोहन राज्य में सामाजिक और आर्थिक विषमता को गहरा कर रहा है। भूजल संरक्षण के मामले में पंजाब की स्थिति देश में सबसे गंभीर है, जहां कुल भूजल खंडों का 76.47 प्रतिशत अत्यधिक दोहन की श्रेणी में आता है। यह आंकड़ा अन्य सभी राज्यों से कहीं अधिक है।
राज्य की खेती अर्थव्यवस्था गेहूं और चावल जैसी जल-गहन फसलों पर भारी निर्भर है, जिसके कारण भूजल का निरंतर अत्यधिक दोहन हो रहा है। इस समस्या से किसानों को गहरे कुएं खोदने के लिए बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है, जो छोटे किसानों के लिए विशेष रूप से कठिन साबित हो रही है।
भूजल स्तर में गिरावट के अलावा, इस अत्यधिक दोहन से भूमि धंसाव और जल की गुणवत्ता में गिरावट जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। ये समस्याएं न केवल कृषि उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि पूरे समाज को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही हैं। अध्ययन से संकेत मिलता है कि भूजल संकट के कारण पंजाब में आर्थिक असमानता बढ़ रही है, जहां संपन्न किसान गहरे कुएं खोदने का खर्च वहन कर सकते हैं, जबकि सीमांत किसान पीछे छूट जा रहे हैं।