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भारत में अवैतनिक काम की समस्या सबसे गंभीर, हर चौथा कर्मचारी 16 घंटे देता है
भारतीय कर्मचारियों में से एक चौथाई हिस्सा प्रति सप्ताह 16 या अधिक घंटे अवैतनिक काम में लगाता है। यह समस्या एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सर्वाधिक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
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भारत में अवैतनिक काम की प्रवृत्ति क्षेत्र में सबसे अधिक है, जहां कार्यबल का 24 प्रतिशत हिस्सा हर हफ्ते 16 घंटे या इससे अधिक समय बिना किसी मेहनताने के काम करता है। यह आंकड़े एडीपी की 'पीपल एट वर्क 2026' रिपोर्ट में दर्ज किए गए हैं जिसमें विभिन्न बाजारों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।
अवैतनिक काम में परिवार के सदस्यों की देखभाल, घरेलू कार्य, समुदाय सेवा और अन्य गतिविधियां शामिल होती हैं। भारत में इस प्रवृत्ति की तीव्रता इस बात को रेखांकित करती है कि कितने लोग औपचारिक कार्य के अतिरिक्त महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हैं। यह स्थिति मुख्यतः परिवार और सामाजिक संरचना के कारण उत्पन्न होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैतनिक काम का उच्च प्रसार कार्य-जीवन संतुलन को प्रभावित करता है और कर्मचारियों की उत्पादकता में कमी लाता है। इसके साथ ही, महिलाओं पर यह दबाव पुरुषों की तुलना में अधिक देखा जाता है। भारतीय बाजार में इस समस्या के समाधान के लिए नीतिगत हस्तक्षेप और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता प्रतीत होती है।