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ट्रेन की सीढ़ियां बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए चुनौती बनी हुई हैं
भारतीय रेलवे में यात्रियों के चढ़ने-उतरने के लिए बनी ऊंची सीढ़ियों और चौड़े अंतराल से सुरक्षा संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेन के फुटबोर्ड को क्रमिक रूप से बदलने से वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों की पहुंच में सुधार आ सकता है।
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रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों में चढ़ना-उतरना बुजुर्ग यात्रियों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक दैनिक संघर्ष बन गया है। मौजूदा डिज़ाइन में ऊंची सीढ़ियां और उनके बीच चौड़े अंतराल न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाते हैं, बल्कि इन वर्गों के लिए रेल यातायात को अव्यावहारिक भी बनाते हैं।
विभिन्न शहरों से आने वाली शिकायतों में यह बात सामने आई है कि वर्तमान संरचना सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है। फुटबोर्ड की ऊंचाई और सीढ़ियों का डिज़ाइन दशकों पुराने मानदंडों पर आधारित है, जो आधुनिक सुलभता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है।
आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से लगातार मांग की जा रही है कि रेलवे विभाग ट्रेनों के फुटबोर्ड को धीरे-धीरे बदलकर उन्हें अधिक सुलभ बनाए। इससे न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को सार्वजनिक परिवहन का बेहतर उपयोग करने का अवसर भी मिलेगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के बदलाव के लिए विस्तृत योजना और पर्याप्त बजट आवंटन की आवश्यकता है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह निवेश जनता की सुरक्षा और समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।