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रेलवे परिसर में स्पीकर मोड में फोन का इस्तेमाल अब दंडनीय अपराध
रेलवे परिसर में जन विश्वास अधिनियम के तहत तेज आवाज में बातें करना एक गंभीर अपराध माना जाएगा। इसके लिए परिसर से निष्कासन, जुर्माना और कारावास का प्रावधान किया गया है।
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रेलवे की पाबंदियों को कड़ा करने के लिए जन विश्वास अधिनियम के माध्यम से संशोधन किए गए हैं। इन नियमों के अनुसार, ट्रेनों और रेलवे परिसर में मोबाइल फोन को स्पीकर मोड में उपयोग करना अब दंडनीय अपराध है। दक्षिण रेलवे ने स्पष्ट किया है कि रेलवे परिसर में तेज आवाज में फोन पर बातें करना भी रेलवे अधिनियम के तहत उपद्रव की श्रेणी में आता है।
इस नियम का उल्लंघन करने वाले यात्रियों को रेलवे परिसर से तुरंत निष्कासित किया जा सकता है। अधिकारियों को ऐसे व्यक्तियों पर आर्थिक जुर्माना लगाने का अधिकार है। गंभीर मामलों में कारावास की सजा का भी प्रावधान किया गया है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह कदम यात्रियों के लिए एक शांतिपूर्ण और सुविधाजनक यात्रा का माहौल सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। यह संशोधन अन्य यात्रियों को परेशान करने वाले व्यवहार को रोकने का लक्ष्य रखता है और रेलवे में सामूहिक अनुशासन बनाए रखने में मदद करेगा।