World · India Bureau
राजस्थान निकाय चुनाव में दलों की 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स', हजारों पार्षद नजरबंद
राजस्थान के निकाय चुनाव में विजयी करीब दस हजार पार्षदों को राजनीतिक दलों ने होटलों और रिसॉर्ट्स में रोक रखा है। इसका उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी दलों के प्रभाव से उन्हें दूर रखना और निगम गठन में किसी विसंगति को रोकना है।
LSN India ·

राजस्थान के निकाय चुनावों के बाद राजनीतिक दलें अपने विजयी पार्षदों को विभिन्न होटलों और रिसॉर्ट्स में रखे हुए हैं। यह कदम सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों द्वारा उठाया गया है ताकि निर्वाचित प्रतिनिधि विरोधी पक्ष के सरीकरण के प्रयासों से सुरक्षित रहें।
विभिन्न नगर निगमों और नगरपालिकाओं में पार्षदों की संख्या के आधार पर बोर्ड का गठन किया जाना है। ऐसी परिस्थितियों में राजनीतिक दलें अपने विजयी पार्षदों को समूहों में होटलों में रखकर उन्हें अपने नियंत्रण में रखना सुनिश्चित करना चाहते हैं। इससे विरोधी पक्ष के किसी भी प्रलोभन या दबाव से मुक्त रहते हुए निर्वाचन प्रक्रिया में उनकी मतदान शक्ति सुरक्षित रहती है।
राजस्थान में यह प्रथा पिछले कई वर्षों से देखी जा रही है, जहां राजनीतिक दलें निर्णायक मुद्दों पर अपने विधायकों और पार्षदों को होटलों में सुरक्षित रखते हैं। इस बार भी लगभग दस हजार पार्षदों को इसी व्यवस्था के तहत रखा गया है, जो निकाय चुनावों के महत्व को दर्शाता है।
प्रशासन की ओर से इस प्रक्रिया पर नजरदारी की जा रही है ताकि बोर्ड गठन प्रक्रिया पारदर्शी और नियमानुसार संपन्न हो सके। निकाय निर्वाचन परिणामों के आधार पर विभिन्न पदों के लिए मतदान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जानी है।