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राजस्थान में दक्षिण भारतीय चंदन की खेती का विस्तार, किसानों का नया रुझान
अलवर जिले के किसान पारंपरिक खेती से परे हटकर दक्षिण भारत में प्रसिद्ध चंदन की व्यावसायिक खेती शुरू कर रहे हैं। वर्तमान में अलवर क्षेत्र में 10,000 से अधिक चंदन के पौधे रोपित किए जा चुके हैं।
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राजस्थान के अलवर जिले में किसान अब परंपरागत कृषि पद्धतियों को छोड़कर चंदन की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। लक्ष्मणगढ़ तहसील के मलावाली गांव के किसान रामकृष्ण मीणा ने इस नई पहल की अगुवाई की है और अपने खेत में 300 चंदन के पौधे लगाए हैं।
मीणा ने इस परियोजना को लागू करने के लिए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने सबसे पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच के लिए दिल्ली भेजी। प्राप्त मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर बेंगलुरु में उसी प्रकार की मिट्टी में चंदन के पौधे तैयार करवाए गए। जब पौधे 4-5 फुट की ऊंचाई तक पहुंच गए, तब उन्हें राजस्थान लाकर खेत में रोपित किया गया।
अलवर क्षेत्र में इस सफल प्रयोग के बाद अन्य किसानों में भी चंदन की खेती को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण देखा जा रहा है। क्षेत्र में अब तक 10,000 से अधिक चंदन के पौधे लगाए जा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि इस व्यावसायिक फसल की संभावनाएं राजस्थान में विकसित हो रही हैं।
चंदन की खेती से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सही जलवायु परिस्थितियां और उपयुक्त मिट्टी की तैयारी से राजस्थान में भी इस मूल्यवान फसल का सफल उत्पादन संभव है। इस नई पहल से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है, बल्कि क्षेत्र में कृषि विविधता भी बढ़ रही है।