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राजीव गांधी के दशक में तीन बड़े सुधार जो भारत बदले
1980 के दशक में राजीव गांधी की सरकार ने मतदान की आयु 18 साल करने, दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास और राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे महत्वपूर्ण सुधार लागू किए। इन कदमों ने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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राजीव गांधी के कार्यकाल में किए गए सुधारों ने भारत के राजनीतिक, तकनीकी और शैक्षिक ढांचे को दिशा दी। इनमें सबसे पहला और व्यापक प्रभाव वाला सुधार मतदान की आयु को 21 से घटाकर 18 साल करना था। इस निर्णय ने लाखों युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर दिया और भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाया।
प्रौद्योगिकी क्षेत्र में राजीव गांधी सरकार की दूरदर्शिता सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) की स्थापना में परिलक्षित होती है। इस संस्थान को भारत में दूरसंचार तकनीक का विकास करने का मुख्य उद्देश्य दिया गया था। सी-डॉट की स्थापना भारत को दूरसंचार क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की एक महत्वपूर्ण कोशिश थी।
शिक्षा के क्षेत्र में 1986 में लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के ढांचे को पुनर्गठित करने का प्रयास किया। इस नीति का उद्देश्य भारतीय शिक्षा व्यवस्था को आधुनिकीकरण करना और विश्व मानकों के अनुरूप बनाना था।
ये तीनों कदम राजीव गांधी के कार्यकाल की विरासत के रूप में आज भी भारतीय समाज को प्रभावित कर रहे हैं। मतदान की आयु में यह कमी, तकनीकी संस्थान और शिक्षा नीति - ये सभी आधुनिक भारत के निर्माण की नींव मानी जाती हैं।