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राज्य सभा की नैतिकता समिति ने सांसदों को संवैधानिक प्राधिकारों को कमजोर करने से रोकने का प्रस्ताव दिया

राज्य सभा की नैतिकता समिति ने सदस्यों को संवैधानिक प्राधिकारों और सहकर्मियों को नुकसान पहुंचाने से बचने का निर्देश दिया है। समिति ने यह भी कहा है कि सदस्यों को संसदीय कार्यवाही के दौरान भाषण की स्वतंत्रता के संरक्षण का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

LSN India · 30 September 2026

राज्य सभा की नैतिकता समिति ने सांसदों को संवैधानिक प्राधिकारों को कमजोर करने से रोकने का प्रस्ताव दिया

राज्य सभा की नैतिकता समिति ने सांसदों के आचरण के संबंध में महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रस्तुत की हैं। समिति का मानना है कि संसद के सदस्यों को संवैधानिक प्राधिकारों को कमजोर करने या किसी सहकर्मी के खिलाफ कार्रवाई करने से परहेज करना चाहिए। यह निर्देश संसदीय आचरण के नियमों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समिति ने विशेष रूप से संसदीय कार्यवाही के दौरान सदस्यों को दिए गए भाषण की स्वतंत्रता के संरक्षण के बारे में चिंता व्यक्त की है। समिति की सिफारिश है कि इस सुरक्षा का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए और सदस्यों को इसका जिम्मेदारी से उपयोग करना चाहिए। यह प्रावधान सांसदों की स्वतंत्रता और संसदीय मानकों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है।

नैतिकता समिति की ये सिफारिशें राज्य सभा के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई हैं। समिति का मानना है कि सांसदों को न केवल अपने अधिकारों का सम्मान करना चाहिए बल्कि संवैधानिक प्राधिकारों और अन्य सदस्यों के प्रति भी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। इन प्रस्तावों से संसदीय संस्कृति को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।