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1991 के सुधारों के लिए राव और सिंह दोनों जरूरी थे: चिदंबरम
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि 1991 के आर्थिक सुधारों में नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने तर्क दिया कि भारत को अब अधिक प्रतिस्पर्धा, खुलेपन और विश्व व्यापार संगठन के पुनरुद्धार की जरूरत है।
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पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि भारत के 1991 के आर्थिक सुधार किसी एक व्यक्ति के प्रयासों से संभव नहीं हो सके होते। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। चिदंबरम के अनुसार, इन दोनों नेताओं के समन्वय और दूरदर्शी नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान की।
1991 के सुधारों ने भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार के लिए खोल दिया था। इस दौर में लाइसेंस राज को समाप्त किया गया, विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया गया और आर्थिक नीतियों में उदारीकरण लाया गया। यह परिवर्तनकारी अवधि भारत के आधुनिक आर्थिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
चिदंबरम ने वर्तमान चुनौतियों पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि भारत को आज अधिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक खुलेपन की आवश्यकता है। उनके विचार में, विश्व व्यापार संगठन को शक्तिशाली करना भी भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यावश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसी तरह की सुधारवादी सोच के साथ भारत को भविष्य की चुनौतियों का सामना करना चाहिए।