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400 साल पुरानी मुगल कालीन 'येर्केस-रिमार्क' कालीन नीलाम को तैयार
सोथेबीज़ में नीलाम होने वाली यह दुर्लभ मुगल कालीन 17वीं सदी की शिकार के दृश्यों और साहसिक नक्शों से सजी है। यह कालीन भारतीय कारीगरी का उत्कृष्ट नमूना है और इसका स्वामित्व प्रमुख व्यक्तियों के पास रहा है।
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मुगल काल की एक असाधारण विरासत, 'येर्केस-रिमार्क' कालीन शीघ्र ही अंतर्राष्ट्रीय नीलामी बाजार में आने जा रही है। सोथेबीज़ की ओर से आयोजित होने वाली इस नीलामी में यह 400 साल पुरानी कालीन शामिल होगी, जो भारतीय कारीगरी के चमत्कार का प्रतीक है।
17वीं सदी में निर्मित, यह कालीन विस्तृत शिकार के दृश्यों और साहसिक पैटर्नों से सुसज्जित है। इसके बुनाई की तकनीक और डिजाइन मुगल साम्राज्य के दौरान भारतीय कला और कारीगरी की उच्च परंपरा को दर्शाती है।
इस कालीन का इतिहास अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके पूर्व स्वामियों में अमेरिकी वित्तपति और उद्यमी चार्ल्स टी. येर्केस तथा जर्मन लेखक एरिक मारिया रिमार्क के नाम शामिल हैं। इसके बाद यह कालीन थाइसन परिवार के संग्रह का भी हिस्सा रही है।
अंतर्राष्ट्रीय कला बाजार में ऐसी प्राचीन मुगल कालीनें दुर्लभ मानी जाती हैं। इसकी ऐतिहासिक महत्ता और कलात्मक उत्कृष्टता इसे कला संग्राहकों के लिए अत्यंत मूल्यवान बनाती है।