Politics · India Bureau
रायलसीमा में बाल यौन शोषण: सुरक्षा की कमी और विलंब की समस्या
आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में POCSO कानून के तहत दर्ज मामलों में असुरक्षा, मौन और देरी की चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है। प्रौद्योगिकी-संचालित जांच के बावजूद, लंबित मामलों और न्याय में विलंब की समस्या बनी हुई है।
LSN India ·

आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में बाल यौन शोषण के मामलों की गंभीर स्थिति सामने आई है, जहां असुरक्षा की भावना, समाज का मौन रुख और प्रभावी हस्तक्षेप में देरी मिलकर परिस्थिति को और गंभीर बनाती है। हालांकि 2025 में राज्य स्तर पर POCSO कानून के तहत मामलों में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन जिलों के स्तर पर स्थिति असंगत है।
चित्तूर जिले में POCSO मामलों में वृद्धि देखी गई है, जबकि अनंतपुर और कुरनूल में संख्या में कमी आई है। इस बीच, विशेष POCSO न्यायालयों में 5,408 मामले लंबित हैं, जो न्याय प्रक्रिया की गति और प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्याय में देरी के पीछे फॉरेंसिक जांच में विलंब, न्यायालय और पुलिस में कर्मचारियों की कमी तथा सामाजिक कलंक और भय प्रमुख कारण हैं। पीड़ित परिवार अक्सर सामाजिक शर्मिंदगी और प्रतिशोध के डर से मामलों की रिपोर्ट करने में संकोच करते हैं।
यद्यपि पुलिस जांच में प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ रहा है, विशेषज्ञ रोकथाम, शीघ्र रिपोर्टिंग और मजबूत बाल-सुरक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं। बाल संरक्षण एवं समाज सेवा विभागों को सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत करने और जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।