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विदेशी मुद्रा व्युत्पन्न बाजार में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कम भागीदारी
भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि सीमा पार व्यापार में स्थानीय मुद्राओं की भूमिका बढ़ेगी। स्थानीय मुद्रा में निपटान से लेनदेन लागत कम होगी और दक्षता में सुधार आएगा।
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भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर ने यह मत व्यक्त किया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विदेशी मुद्रा व्युत्पन्न बाजार में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बाजार में सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं की भागीदारी वर्तमान में अपेक्षित स्तर से कम है।
डिप्टी गवर्नर के अनुसार, आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भुगतान प्रणाली में स्थानीय मुद्राओं की महत्ता बढ़ने वाली है। उन्होंने कहा कि स्थानीय मुद्राओं में सीमा पार निपटान करने से कई लाभ हैं। इससे मुद्रा विनिमय से संबंधित लेनदेन लागत में कमी आती है और विदेशी मुद्रा संबंधी जोखिम भी घटते हैं।
यह कदम व्यापार प्रक्रियाओं में दक्षता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। स्थानीय मुद्रा निपटान से न केवल लागत में बचत होती है, बल्कि भुगतान प्रणाली की गति और विश्वसनीयता में भी सुधार होता है। इसका सकारात्मक प्रभाव व्यापारियों और बैंकों दोनों पर पड़ता है।
रिजर्व बैंक के शीर्ष अधिकारी ने संकेत दिया कि बेहतर नीति समन्वय और बैंकों की सक्रिय भागीदारी से यह रणनीति कामयाब हो सकती है। इससे भारत और दक्षिण एशिया के व्यापारिक संबंधों को मजबूत किया जा सकता है तथा वैश्विक व्यापार में स्थानीय मुद्राओं की स्वीकृति बढ़ाई जा सकती है।