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रुपये की रक्षा के लिए आरबीआई ने 75-80 अरब डॉलर खर्च किए: बैंकर
भारतीय रिजर्व बैंक ने जून के बाद से अपनी 140 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा पूंजी का लगभग आधा हिस्सा रुपये की कमजोरी से बचाने में लगा दिया है। तेल की कीमतों में वृद्धि, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और विदेशी निवेशकों के पलायन के बीच यह कदम उठाया गया है।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जून माह से लेकर अब तक रुपये को मजबूत रखने के लिए अनुमानित 75 से 80 अरब डॉलर की राशि खर्च की है। बैंकिंग क्षेत्र के विश्लेषकों की यह अनुमान आरबीआई की विदेशी मुद्रा भंडार की 140 अरब डॉलर की कुल राशि का लगभग आधा प्रतिनिधित्व करती है।
रिजर्व बैंक ने इस रक्षा कार्यक्रम को स्पॉट बाजार में डॉलर की बिक्री और मुद्रा स्वैप के माध्यम से संचालित किया है। ये उपाय भारतीय करेंसी पर बढ़ते दबाव को संभालने के लिए आवश्यक माने गए हैं।
रुपये पर दबाव मुख्यतः तीन कारकों से आ रहा है। वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार से पूंजी निकासी इन प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
रिजर्व बैंक की यह सक्रिय कार्रवाई भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता को बनाए रखने और आयात बिल में अचानक वृद्धि से बचाने के उद्देश्य से की जा रही है। विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार पर और भी दबाव बढ़ सकता है।