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भारतीय रिजर्व बैंक के प्रवेश द्वार पर क्यों हैं यक्ष-यक्षिणी की मूर्तियां

भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्य द्वार पर स्थापित यक्ष-यक्षिणी की प्रतिमाएं केवल धन के देवता कुबेर के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि प्राचीन भारतीय परंपरा में संपदा की सुरक्षा और समृद्धि के गहरे अर्थ को दर्शाती हैं।

LSN India · 5 November 2026

भारतीय रिजर्व बैंक के प्रवेश द्वार पर क्यों हैं यक्ष-यक्षिणी की मूर्तियां

भारतीय संस्कृति में कुबेर को जल तत्व और उत्तर दिशा के स्वामी के रूप में माना जाता है। हालांकि, यक्षों की अवधारणा इससे कहीं व्यापक और गहन है। ये केवल धन के संरक्षक नहीं बल्कि प्रकृति की सभी मूल्यवान संपदाओं के रक्षक माने जाते हैं।

प्राचीन ग्रंथों में यक्षों को धरती में छिपे खजानों, कीमती पत्थरों, खनिजों, जल स्रोतों और वन संपदा के अधिष्ठाता के रूप में वर्णित किया गया है। यह परंपरागत विश्वास समाज में आर्थिक संपन्नता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व को दर्शाती है।

भारतीय रिजर्व बैंक के प्रवेश द्वार पर यक्ष-यक्षिणी की मूर्तियों की स्थापना राष्ट्रीय वित्तीय संस्था के मूल कार्य से गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव दर्शाती है। ये प्रतिमाएं केवल मुद्रा प्रबंधन नहीं, बल्कि सामाजिक समृद्धि और संसाधनों की सुरक्षित व्यवस्था के प्रतीक हैं।

इस प्रकार, यक्षों को संपदा रक्षक के रूप में समझना भारतीय संस्कृति में आर्थिक नैतिकता और टिकाऊ विकास की सदियों पुरानी परंपरा को दर्शाता है।