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विदेशी मुद्रा प्रवाह से भारत के भुगतान संतुलन को अस्थायी राहत
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि आरबीआई के विदेशी मुद्रा संचय में वृद्धि से तत्काल दबाव कम हुआ है, लेकिन बढ़ते आयात और वैश्विक ब्याज दरों से बाहरी खाते पर दीर्घकालिक चुनौतियां बनी रहेंगी।
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भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी ने देश के भुगतान संतुलन पर तत्काल दबाव को कम करने में मदद दी है। हालांकि, उन्होंने चेताया कि कई संरचनात्मक कारक इस समस्या को दीर्घकालिक समस्या बनाए रखेंगे।
नागेश्वरन के अनुसार, बढ़ते आयात और कच्चे माल पर भारत की निर्भरता विदेशी मुद्रा पर निरंतर दबाव डालेंगी। वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों में वृद्धि और विकसित देशों की ओर पूंजी का रुझान भी भारत के बाहरी खाते के लिए चुनौती बनी रहेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि आरबीआई की विदेशी मुद्रा भंडार रणनीति अल्पकालिक स्थिरता सुनिश्चित करती है, लेकिन आयात में संतुलन और निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में संरचनागत सुधार की आवश्यकता है।
भारत के आर्थिक नीति निर्माता इन चुनौतियों से निपटने के लिए निर्यात प्रतिस्पर्धिता बढ़ाने और आयात प्रतिस्थापन रणनीति पर फोकस कर रहे हैं।