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विदेशी मुद्रा जोखिम के लिए बैंकों को CRR से अतिरिक्त 20% रखना होगा
भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि बैंकों को अनिवार्य CRR शेष से ऊपर विदेशी मुद्रा जोखिम रिज़र्व के रूप में 20% राशि अलग रखनी होगी। यह नया नियम हेजिंग लागत को बढ़ाता है और फॉरवर्ड प्रीमियम में वृद्धि करता है।
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भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग क्षेत्र के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिसमें विदेशी मुद्रा के संबंध में जोखिम प्रबंधन को कड़ा किया गया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, सभी वाणिज्यिक बैंकों को अपने अनिवार्य नकद आरक्षण अनुपात (CRR) में रखी जाने वाली राशि के अतिरिक्त एक विदेशी मुद्रा जोखिम रिज़र्व बनाना होगा।
इस विदेशी मुद्रा जोखिम रिज़र्व की न्यूनतम राशि CRR खातों में रखी जाने वाली अनिवार्य राशि से 20 प्रतिशत अधिक होगी। यह प्रावधान विदेशी मुद्रा बाजार में बैंकों के जोखिम को सीमित करने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
नए नियम बैंकिंग क्षेत्र के लिए अतिरिक्त लागत का कारण बनेंगे क्योंकि हेजिंग के माध्यम से विदेशी मुद्रा जोखिम को प्रबंधित करने की लागत में वृद्धि होगी। इसका सीधा असर फॉरवर्ड प्रीमियम पर भी पड़ेगा, जो विदेशी मुद्रा की भविष्य की कीमतों में परिलक्षित होता है।
इंडस्ट्री विশेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विदेशी मुद्रा बाजार में बेहतर नियंत्रण स्थापित करने और बैंकों की तरलता जोखिमों को कम करने के लिए उठाया गया है। नई व्यवस्था सभी बैंकों के लिए तुरंत प्रभाव से लागू होगी और वे अपनी आंतरिक नीतियों को इसके अनुसार संशोधित करने के लिए बाध्य होंगे।