Business · India Bureau
भारतीय रिजर्व बैंक को चार ट्रिलियन रुपये अधिशेष को अवशोषित करने में समय लगेगा
भारतीय रिजर्व बैंक के पास चल रहे तरलता अधिशेष को प्रबंधित करने के लिए दूसरी तिमाही तक का समय है। केंद्रीय बैंक विभिन्न वित्तीय उपकरणों का उपयोग करके इस अधिशेष को धीरे-धीरे कम करेगा।
LSN India ·

भारतीय रिजर्व बैंक को लगभग चार ट्रिलियन रुपये के दीर्घकालिक तरलता अधिशेष को अवशोषित करने के लिए वित्त वर्ष 2027-28 की दूसरी तिमाही तक का समय लग सकता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस कार्य को सुव्यवस्थित तरीके से पूरा करेगा।
रिजर्व बैंक के पास तरलता को प्रबंधित करने के लिए कई उपकरण उपलब्ध हैं। इनमें खुले बाजार में प्रतिभूतियों की बिक्री, रिवर्स रेपो ऑपरेशन और अन्य वित्तीय साधन शामिल हैं। ये सभी उपकरण बैंकिंग प्रणाली से तरलता को क्रमिक तरीके से निकालने में मदद करते हैं।
अर्थनीति विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्रमिक दृष्टिकोण से वित्तीय बाजारों में कोई अचानक झटका नहीं आएगा। तरलता को धीरे-धीरे अवशोषित करने से मौद्रिक नीति के उद्देश्यों को भी बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
इस अधिशेष की स्थिति देश की आर्थिक गतिविधियों और बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश के कारण बनी है। रिजर्व बैंक द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीति वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगी।