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आरबीआई के कदमों से रुपये को राहत मिल सकती है, लेकिन वित्त वर्ष 27 तक नए निम्न स्तर की संभावना
एक सर्वेक्षण में विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये पर मूल्यह्रास का दबाव बना रहेगा। कुछ विश्लेषकों का सुझाव है कि भारतीय रिजर्व बैंक को इस दबाव से निपटने के लिए ब्याज दरों में अधिक आक्रामक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
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भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए हाल के कदम रुपये को कुछ स्थिरता प्रदान कर सकते हैं, लेकिन अगले वित्तीय वर्ष के अंत तक भारतीय मुद्रा नए निम्न स्तर को छू सकती है। एक व्यापक बाजार सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों का यह आकलन सामने आया है।
सर्वेक्षण के अनुसार, विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि आने वाले महीनों में रुपये पर कमजोरी का दबाव जारी रहेगा। उनके विचार से, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और पूंजी प्रवाह की स्थिति रुपये को प्रभावित करती रहेगी।
इस दबाव का मुकाबला करने के लिए, कुछ विश्लेषकों का मत है कि आरबीआई को अपनी मौद्रिक नीति को और कठोर बनाने की आवश्यकता हो सकती है। ब्याज दरों में अधिक आक्रामक वृद्धि से विदेशी निवेशकों को भारतीय परिसंपत्तियों में निवेश के लिए बेहतर रिटर्न मिल सकता है, जिससे रुपये पर मजबूती का दबाव बन सकता है।
बाजार प्रतिभागियों का कहना है कि आरबीआई के मौजूदा हस्तक्षेप अल्पकालिक आधार पर रुपये को संभालने में सहायक साबित हो रहे हैं, किंतु संरचनात्मक चुनौतियां बनी हुई हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक रुपये के मूल्य में और गिरावट की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।