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डॉलर स्वैप विंडो से आने वाले पूंजी प्रवाह 2013 के स्तर से अधिक
भारतीय रिजर्व बैंक ने डॉलर के अत्यधिक आगमन को नियंत्रित करने के लिए अगस्त में घोषणा की है। यह प्रवाह 2013 में राघुराम राजन के नेतृत्व में शुरू की गई समान योजना से कहीं अधिक है।
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विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की आमद को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अगस्त की घोषणा के तहत, केंद्रीय बैंक स्वैप विंडो के माध्यम से डॉलर प्रवाह को सीमित करने का प्रयास कर रहा है।
वर्तमान में डॉलर आगमन पहले से ही 26 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुका है, जो 2013 में तत्कालीन गवर्नर राघुराम राजन द्वारा शुरू की गई एक समान योजना के दौरान जुटाई गई राशि थी। यह तुलना दर्शाती है कि वर्तमान विदेशी निवेश का दबाव पिछली दशक की तुलना में कितना अधिक है।
स्वैप विंडो के माध्यम से विदेशी मुद्रा के आने-जाने को नियंत्रित करना मौद्रिक नीति का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इससे रिजर्व बैंक मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने का प्रयास करता है और अत्यधिक विदेशी निवेश से होने वाली जटिलताओं से बचाव करता है।
अर्थनीति विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयां भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं। विदेशी पूंजी का अत्यधिक प्रवाह रुपये की मजबूती और स्थानीय बाजारों पर दबाव डाल सकता है।