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विदेशी जमा वृद्धि से RBI को 6-7 लाख करोड़ की तरलता निकालनी होगी
HSBC के मुख्य भारत अर्थशास्त्री का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक को आने वाले पखवाड़े में अतिरिक्त तरलता को बाहर निकालने के लिए कैश रिजर्व अनुपात बढ़ाना या डॉलर बिक्री करनी चाहिए।
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विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा में असाधारित वृद्धि से भारतीय रिजर्व बैंक के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। विश्लेषकों के अनुमान से अधिक इन जमा राशियों के कारण केंद्रीय बैंक को बाजार में अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करना पड़ रहा है।
HSBC के मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के विश्लेषण में कहा गया है कि RBI को आने वाले 15 दिनों के भीतर 6 से 7 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता को बाहर निकालना होगा। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय बैंक के पास दो मुख्य विकल्प हैं - नकद आरक्षण अनुपात में वृद्धि करना या विदेशी मुद्रा की बिक्री करना।
तरलता प्रबंधन में यह कदम मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने और मौद्रिक नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार में अधिक पूंजी प्रवाह होने के कारण यह स्थिति बनी है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि RBI द्वारा अगले कुछ दिनों में लिए जाने वाले निर्णय मुद्रा बाजार और समग्र आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डालेंगे। ऐसे में केंद्रीय बैंक के सावधानीपूर्वक कदमों की जरूरत है ताकि विकास दर को नुकसान न पहुंचे।