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मुद्रास्फीति नियंत्रण में केंद्रीय सहायता जरूरी: आरबीआई
भारतीय रिज़र्व बैंक की नीति समीक्षा में मुद्रास्फीति से प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए सरकारी सहयोग की आवश्यकता है। एकमात्र मौद्रिक नीति से यह लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है।
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भारतीय रिज़र्व बैंक की आसन्न नीति समीक्षा में देश की बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार के सक्रिय समर्थन की अपेक्षा की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौद्रिक नीति अकेले इस चुनौती से निपटने के लिए अपर्याप्त है और राजकोषीय उपायों की भी आवश्यकता है।
वर्तमान में महंगाई की दर लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, जिससे उपभोक्ता खरीद क्षमता प्रभावित हो रही है। आरबीआई की नीति दर में बदलाव के अलावा, सरकार को खाद्य उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और राजस्व संग्रह में सुधार जैसे कदम उठाने होंगे।
विश्लेषकों का कहना है कि केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच समन्वित रुख से ही मुद्रास्फीति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा। इसके बिना, अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है और विकास दर प्रभावित हो सकती है।
इस संदर्भ में आरबीआई की आने वाली नीति घोषणा महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें न केवल ब्याज दरों बल्कि समग्र आर्थिक स्थिरता के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।