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रेपो रेट की समीक्षा जरूरी हो सकती है, लेकिन अभी नहीं: RBI सदस्य
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने कहा है कि यदि मुद्रास्फीति में व्यापकता आए तो रेपो दर की पुनः समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन वर्तमान आंकड़े ब्याज दर में वृद्धि के चक्र को सही नहीं ठहराते।
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भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने कहा है कि रेपो दर को पुनः आकलन करने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अगली नीति कदम ब्याज दर में बढ़ोतरी होगी। भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि यह मूल्यांकन तभी आवश्यक हो सकता है जब मुद्रास्फीति में व्यापकता देखने को मिले।
MPC सदस्य के अनुसार, वर्तमान आर्थिक आंकड़े यह संकेत नहीं देते कि RBI को दरों में बढ़ोतरी का चक्र शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा है कि चालू समय में मुद्रास्फीति की स्थिति और आर्थिक विकास दोनों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत रुख तय किया जा रहा है।
भट्टाचार्य की टिप्पणी इस बात को दर्शाती है कि RBI की मौद्रिक नीति समिति अभी सतर्क दृष्टिकोण बनाए रखी है। वे मानते हैं कि मुद्रास्फीति पर निरंतर निगरानी रखी जानी चाहिए, लेकिन जब तक व्यापक मूल्य वृद्धि के संकेत न मिलें, तब तक दरों में तेजी से बदलाव की आवश्यकता नहीं है।
RBI ने अब तक अपनी नीति दर को स्थिर बनाए रखा है। भट्टाचार्य की इस टिप्पणी से यह संदेश मिलता है कि केंद्रीय बैंक अपने नीतिगत रुख को डेटा-चालित रखेगा और आवश्यक होने पर ही कोई बदलाव करेगा।