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भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को संरचनात्मक विदेशी मुद्रा स्थिति को बाहर रखने की अनुमति दी
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए एक नए ढांचे को मंजूरी दी है जो अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा। यह नई व्यवस्था निवेश पुनर्वर्गीकरण नियमों को कड़ा करने और ऋण निधि पूंजी उपचार को संशोधित करने के साथ-साथ चलती है।
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भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को अपनी संरचनात्मक विदेशी मुद्रा स्थितियों को शुद्ध खुली स्थिति गणना से बाहर रखने की अनुमति दी है। यह निर्णय भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है जो विदेशी मुद्रा जोखिम प्रबंधन को प्रभावित करेगा।
नई नियामक व्यवस्था अप्रैल 2027 से प्रभावी होगी और निवेश पोर्टफोलियो के प्रबंधन में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाएगी। इस ढांचे के तहत, भारतीय रिजर्व बैंक ने निवेश पुनर्वर्गीकरण नियमों को और अधिक कड़ा करने का निर्णय लिया है। साथ ही, ऋण निधि और अन्य वित्तीय साधनों के लिए पूंजी उपचार में भी संशोधन किए गए हैं।
यह नया ढांचा बैंकों को अधिक लचीलापन प्रदान करते हुए वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है। संरचनात्मक विदेशी मुद्रा स्थिति में छूट का अर्थ है कि दीर्घकालिक विदेशी निवेश और परिचालन संबंधी आवश्यकताओं से जुड़ी मुद्रा स्थितियों को अलग तरीके से परिभाषित किया जाएगा।
भारतीय रिजर्व बैंक का यह निर्णय भारतीय बैंकिंग प्रणाली को अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ और अधिक संरेखित करता है। यह कदम विदेशी व्यापार और निवेश से जुड़े बैंकों की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायता करेगा।