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अक्टूबर में आरबीआई दरें 0.25% बढ़ा सकता है: विशेषज्ञ सर्वेक्षण
मुद्रास्फीति के दबाव और वैश्विक संकट के बीच भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। यह कदम 2025 में दरों में कटौती के बाद नीति में बदलाव को दर्शाएगा।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना जता रहा है। अर्थशास्त्रियों और बैंकारों का एक सर्वेक्षण इस संभावना की ओर इशारा करता है। मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव, पश्चिम एशिया में संकट के पुनः गंभीर होने और वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा दरें बढ़ाने के निर्णय इस कदम के मुख्य कारण हैं।
आरबीआई की नीति रेपो दर वर्तमान में 5.25 प्रतिशत पर है। फरवरी 2023 में आरबीआई ने पिछली बार दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जिससे रेपो दर 6.50 प्रतिशत हो गई थी। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने 2023-24 में दरें अपरिवर्तित रखी थीं और 2025 में दर कटौती का चक्र शुरू किया था।
अक्टूबर में दर बढ़ोतरी का निर्णय पिछले वर्षों की नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों के साथ तालमेल, बढ़ते मुद्रास्फीति जोखिम और मजबूत आर्थिक वृद्धि दर बढ़ोतरी के लिए नीतिगत गुंजाइश प्रदान करते हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार, वैश्विक दर वृद्धि और घरेलू आर्थिक स्थिति आरबीआई को इस कदम के लिए प्रेरित कर रही है।