World · India Bureau
चार साल बाद RBI ने दरें बढ़ाईं, EMI से बड़ी चिंता हो सकती है
भारतीय रिजर्व बैंक ने लगभग चार साल के अंतराल के बाद ब्याज दरों में वृद्धि की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ईएमआई से कहीं अधिक गंभीर आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं।
LSN India ·

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने हाल ही में नीति दरों में वृद्धि का निर्णय लिया है। यह कदम लगभग चार वर्षों के बाद उठाया गया है, जब कोविड-19 महामारी के बाद RBI ने दरों को कम रखा था। इस बढ़ोतरी के फलस्वरूप होम लोन, कार लोन और अन्य उपभोक्ता ऋणों की ईएमआई में वृद्धि का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती ईएमआई समस्या का केवल एक पहलू है। दरों में वृद्धि से बचत खातों पर रिटर्न बढ़ने की उम्मीद है, जो मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए लाभकारी हो सकता है। साथ ही, यह कदम मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
अर्थव्यवस्था के व्यापक संदर्भ में देखें तो दरों में वृद्धि से उत्पादन और निवेश पर दबाव पड़ सकता है। छोटे और मध्यम उद्यम जो सस्ते कर्ज पर निर्भर हैं, उन्हें अपनी विस्तार योजनाओं को पुनर्विचार करना पड़ सकता है। इससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास दर प्रभावित हो सकती है।
RBI के इस फैसले का उद्देश्य मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर लाना है। विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में और भी दरें बढ़ाई जा सकती हैं। उपभोक्ताओं और व्यवसायियों को इस वातावरण में अपनी वित्तीय योजनाओं को दृढ़ करना होगा।