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RBI की दरों में बदलाव से कर्जदारों और बचतकर्ताओं को असमान लाभ

रिजर्व बैंक की पिछली नीति चक्र में रेपो दर में कटौती का सीधा असर कर्ज और जमा दरों पर नहीं पड़ा। विभिन्न वर्गों के कर्जदारों और जमाकर्ताओं को इसका प्रभाव अलग-अलग रहा।

LSN India · 8 October 2026

RBI की दरों में बदलाव से कर्जदारों और बचतकर्ताओं को असमान लाभ

भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया नीति चक्र में एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है - रेपो दर में बदलाव का असर सभी वर्गों के कर्जदारों और बचतकर्ताओं पर समान रूप से नहीं हुआ। केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में जो समायोजन किए गए, वे बैंकों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक समान गति से नहीं पहुंचे।

इस असमानता के पीछे बैंकिंग क्षेत्र की संरचना और प्रतिस्पर्धा की कमी जैसे कारक प्रमुख रहे। खुदरा कर्जदारों के लिए आवास और ऑटोमोबाइल ऋण पर दरों में बदलाव तीव्र रहा, जबकि छोटे व्यावसायिक कर्जदारों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल सका। इसी तरह, जमा दरों में भी बैंकों की ओर से विभेदकारी रुख देखा गया।

जमाकर्ताओं के मामले में स्थिति और भी जटिल रही। व्यक्तिगत खाताधारकों, विशेषकर छोटे बचतकर्ताओं को, बड़े कॉर्पोरेट जमाकर्ताओं की तुलना में दरों में बदलाव धीमी गति से मिला। बैंकों ने अपनी तरलता आवश्यकताओं के अनुसार जमा दरों में भेदभाव बनाए रखा।

विश्लेषकों का मानना है कि यह असमानता आरबीआई की नीति के प्रभावकारिता में बाधा डालती है। जब तक बैंकिंग क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक मौद्रिक नीति का आशातीत परिणाम प्राप्त करना कठिन रहेगा। विशेषज्ञ सुझाते हैं कि नीति दरों का समान संचरण सुनिश्चित करने के लिए अधिक निरीक्षण और नियंत्रण आवश्यक है।