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अमेरिकी फेड के कदम के बाद भारतीय दरों में उछाल की संभावना बढ़ी
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत कार्रवाई के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना मजबूत हुई है। भारत में इसके प्रभाव पहले से ही दिख रहे हैं।
LSN India ·
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की हालिया नीतिगत कार्रवाई के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक की अक्टूबर नीति समीक्षा में दरें बढ़ाने की संभावना अब अधिक अनिश्चित हो गई है। बाजार विश्लेषकों के बीच आरबीआई की अगली कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है।
अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों की बढ़ती पैदावार और डॉलर के मजबूत होने का भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। रुपया वर्तमान में 96 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी उपज 5 प्रतिशत से ऊपर चली गई है, जिससे पूंजी बाहर निकलने का दबाव बढ़ा है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर स्थिर बनी हुई हैं। यह विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगाई का दबाव बढ़ाता है। भारत के लिए यह सभी कारक नीति निर्णय को और जटिल बना देते हैं।
आरबीआई को मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के साथ-साथ विदेशी निवेश के बहिर्वाह की चिंता भी करनी होगी। अक्टूबर की नीति समीक्षा में केंद्रीय बैंक के लिए संतुलनकारी रुख अपनाना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।