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नकदी का विरोधाभास: भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना का मूल उद्देश्य

भारतीय रिज़र्व बैंक की 1935 में स्थापना के प्रमुख कारणों में से एक बैंकनोट जारी करने को नियंत्रित करना था। यह भारत के मौद्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है जो आज भी प्रासंगिक है।

LSN India · 19 August 2026

नकदी का विरोधाभास: भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना का मूल उद्देश्य

भारत में आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था की नींव रखते हुए, 1935 में भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना की गई थी। इस संस्था के गठन के पीछे मुख्य उद्देश्यों में से एक राष्ट्र की मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण और बैंकनोट जारी करने की व्यवस्था को विनियमित करना था। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था में आर्थिक स्थिरता लाने के लिए आवश्यक माना गया था।

रिज़र्व बैंक की स्थापना से पूर्व, भारत में मुद्रा जारी करने का अधिकार विभिन्न अधिकारियों के पास बिखरा हुआ था। इससे मुद्रा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में असंगति देखी जाती थी। केंद्रीय बैंकिंग प्राधिकार की अनुपस्थिति आर्थिक विकास में एक बड़ी बाधा बनी हुई थी।

रिज़र्व बैंक को एक केंद्रीय मौद्रिक प्राधिकार के रूप में स्थापित करके, सरकार ने राष्ट्रव्यापी मुद्रा नियंत्रण की एकीकृत व्यवस्था लागू की। इसने भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक सुसंगठित और नियंत्रित तरीके से संचालित करने में मदद की।

आज रिज़र्व बैंक न केवल मुद्रा जारी करने बल्कि मौद्रिक नीति निर्धारण, बैंकिंग क्षेत्र के विनियमन और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संभालता है। इसकी स्थापना के समय का वह बुनियादी उद्देश्य आज भी भारतीय वित्तीय तंत्र का केंद्रबिंदु बना हुआ है।