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आरबीआई की विदेशी मुद्रा जमा योजना एक महीने पहले बंद हुई
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जून में शुरू की गई रियायती स्वैप विंडो के तहत वाणिज्यिक बैंकों ने 133 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा गैर-निवासी खाता जमा राशि एकत्र की। अत्यधिक प्रतिक्रिया के कारण यह योजना निर्धारित समय से एक महीने पहले बंद कर दी गई।
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भारतीय रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्यिक बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा गैर-निवासी खाता (एफसीएनआर-बी) जमा में असाधारण प्रतिक्रिया दिखी है। जून में केंद्रीय बैंक द्वारा शुरू की गई इस विशेष स्वैप सुविधा के अंतर्गत बैंकों ने कुल 133 अरब डॉलर की राशि जुटाई है।
एफसीएनआई-बी योजना भारत में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित हुई है। इस रियायती स्वैप विंडो की व्यापक सफलता के परिणामस्वरूप, आरबीआई को योजना को निर्धारित अवधि से एक महीने पहले ही बंद करना पड़ा। इस कदम से स्पष्ट है कि बैंकों की ओर से विदेशी मुद्रा जमा के लिए कितनी मजबूत मांग थी।
आरबीआई की रिपोर्ट में उल्लेख है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने भारतीय रुपये के मूल्य को प्रभावित किया है। विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए आरबीआई की यह पहल विभिन्न आर्थिक दबावों को संतुलित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास रही है।
यह योजना विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों और अनिवासी भारतीयों के लिए भारतीय रुपये में निवेश करने का एक आकर्षक विकल्प प्रदान करती है। इस प्रकार की पहल भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।