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फ्लेक्सी लोन पर प्रतिबंध: क्या आरबीआई को लचीला रुख अपनाना चाहिए?

भारतीय रिज़र्व बैंक के फ्लेक्सी लोन पर सर्वव्यापी प्रतिबंध को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि संरचनात्मक सुरक्षा उपायों के साथ इस उत्पाद को विनियमित करना, पूर्ण प्रतिबंध से बेहतर विकल्प हो सकता है।

LSN India · 13 September 2026

फ्लेक्सी लोन पर प्रतिबंध: क्या आरबीआई को लचीला रुख अपनाना चाहिए?

फ्लेक्सी लोन को लेकर नियामकीय स्तर पर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। इस प्रकार के ऋण का मूल विशेषता पुनः भुगतान की व्यवस्था है, न कि पुनः उपयोग की सुविधा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतर को समझना नियामकीय निर्णय के लिए महत्वपूर्ण है।

आरबीआई द्वारा फ्लेक्सी लोन पर लगाया गया सम्पूर्ण प्रतिबंध कुछ वर्गों में विवाद का कारण बना है। आलोचकों का तर्क है कि इस उत्पाद की संरचना में ही समस्या नहीं है, बल्कि इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत उपाय की जरूरत है। यदि सही तरीके से विनियमित किया जाए तो यह ऋण उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी हो सकता है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि नियामक को ऋण को हमेशा बढ़ाते रहने की प्रवृत्ति, जिसे 'एवरग्रीनिंग' कहा जाता है, के विरुद्ध विशिष्ट सुरक्षा उपाय लागू करने चाहिए। ये सुरक्षा उपाय उधारकर्ताओं को जोखिम से बचाते हुए बैंकों को इस उत्पाद को जिम्मेदारी से पेश करने की अनुमति दे सकते हैं। सही संतुलन खोजना यहां महत्वपूर्ण है।

यह विचार-विमर्श दर्शाता है कि कड़े प्रतिबंध के बजाय, बेहतर विनियमन और पारदर्शिता के माध्यम से वित्तीय उत्पादों को सुरक्षित रखना संभव है। आने वाले समय में आरबीआई के निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि क्या नियामक इस मुद्दे पर अपने दृष्टिकोण को पुनः विचार करेगा।