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इस बार RBI की नीति चक्र में आ रहा है बदलाव
रेपो दर को प्रभावी संकेत बनाए रखने के लिए भारित औसत कॉल दर को उसके साथ तालमेल बिठाना जरूरी है। वर्तमान मौद्रिक नीति चक्र में यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो उठा है।
LSN India ·

भारतीय रिजर्व बैंक की वर्तमान नीति चक्र पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अलग दिख रहा है। मौद्रिक नीति के संचरण में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रेपो दर और बाजार में व्यवहारिक रूप से लागू होने वाली कॉल दर में तालमेल बना रहे।
भारित औसत कॉल दर, या डब्ल्यूएसीआर, को रेपो दर के करीब रखना केंद्रीय बैंक के संकेतों को बाजार तक सटीकता से पहुंचाने के लिए आवश्यक है। जब दोनों दरों में अंतर बढ़ता है, तो बैंकिंग प्रणाली में तरलता की स्थिति का संकेत मिलता है और मौद्रिक नीति की प्रभावशीलता प्रभावित होती है।
वर्तमान परिवेश में यह विसंगति ध्यान में आई है क्योंकि बाजार की गतिविधियां और तरलता प्रबंधन की रणनीति RBI की नीति दिशा से पूरी तरह मेल नहीं खा रही हैं। इस मुद्दे को संबोधित करना RBI के लिए आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा ताकि मौद्रिक नीति के लक्ष्य प्रभावी तरीके से प्राप्त हो सकें।
विश्लेषकों का मानना है कि तरलता प्रबंधन उपकरणों का बेहतर समन्वय इस चुनौती से निपटने में मदद कर सकता है। रेपो दर को वास्तविक बाजार दरों के साथ संरेखित रखना दीर्घकालिक मौद्रिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।