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घूर्णन ऋण पर प्रतिबंध से अधिक ऋणदाताओं को संकट, एनबीएफसी की चिंता
भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित घूर्णन ऋण प्रतिबंध से बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में चिंता बढ़ गई है। उद्योग ने सीमित पुनः आहरण और आपूर्ति श्रृंखला वित्त जैसे उत्पादों पर स्पष्टता मांगी है।
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भारत की वित्तीय संस्थाएं केंद्रीय बैंक से घूर्णन ऋण संबंधी नीति पर तत्काल स्पष्टता की मांग कर रही हैं। बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का तर्क है कि एक व्यापक प्रतिबंध से उद्योग के एक बड़े हिस्से पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
उद्योग के प्रतिनिधियों ने रिजर्व बैंक को सूचित किया है कि घूर्णन ऋण सुविधा कई महत्वपूर्ण वित्तीय उत्पादों का मूल आधार है। विशेषकर सीमित पुनः आहरण सुविधा और आपूर्ति श्रृंखला वित्तपोषण जैसे क्षेत्रों में इसका महत्वपूर्ण उपयोग होता है। ऋणदाताओं का कहना है कि इन उत्पादों को वर्तमान नियामक प्रस्तावों से अलग माना जाना चाहिए।
एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा ऋण वसूली प्रक्रिया से संबंधित है। वित्तीय संस्थाएं जानना चाहती हैं कि क्या नए नियमों के तहत भी वे अनिवार्य 1600 नंबर श्रृंखला के माध्यम से वसूली कॉल जारी रख सकते हैं। यह स्पष्टता उनके संचालन और ग्राहक प्रबंधन प्रणालियों को प्रभावित करती है।
रिजर्व बैंक से व्यापक परामर्श प्रक्रिया के बाद अपेक्षा की जा रही है कि नई नीति घोषणा जल्द ही आ सकती है। इस बीच, उद्योग की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि किसी भी नियामक निर्णय में ऋण बाजार की व्यावहारिक आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए।