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रुपये को मजबूत करने के आरबीआई कदम से सरकारी बॉन्ड और शेयर बाजार प्रभावित
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रुपये के समर्थन के लिए उठाए गए कदमों का असर सरकारी प्रतिभूति बाजार और प्रमुख शेयर सूचकांकों पर पड़ रहा है। हालांकि, मझोले और छोटे कंपनियों के शेयर सूचकांक में सकारात्मक रुझान देखे जा रहे हैं।
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भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा राष्ट्रीय मुद्रा को समर्थन देने के लिए अपनाए गए नीतिगत उपायों का असर देश के वित्तीय बाजारों पर स्पष्ट दिख रहा है। सरकारी बांड और प्रमुख समता सूचकांकों को इन कदमों से दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जबकि मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर सूचकांक में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है।
निफ्टी मिडकैप 150 सूचकांक में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार की व्यापक प्रवृत्ति से अलग है। इसके विपरीत, निफ्टी स्मॉलकैप 250 सूचकांक में 1.13 प्रतिशत की अधिक सकारात्मक गति दिखाई दी है।
आरबीआई के हस्तक्षेप के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप खंडों में बेहतर प्रदर्शन छोटे और मझोले उद्यमों की मजबूती का संकेत दे रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रवृत्ति घरेलू आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग प्रभाव को दर्शाती है।
मौद्रिक नीति के उपायों के साथ बाजार के समायोजन की प्रक्रिया जारी है, जिसके दौरान निवेशक विभिन्न खंडों में विभिन्न संभावनाएं तलाश रहे हैं।