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अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ाए RBI, बाहरी माहौल चुनौतीपूर्ण: विश्लेषक
वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक को अक्टूबर में ही ब्याज दरों में वृद्धि करनी चाहिए और दिसंबर का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया है कि यह कदम तरलता अवशोषण के उपायों के साथ मिलकर उठाया जाना चाहिए।
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भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष विदेशी दबाव बढ़ते जा रहे हैं, इसी संदर्भ में प्रमुख अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा है कि रिजर्व बैंक को जल्दी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मौद्रिक नीति को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वैश्विक परिस्थितियां अभी भी कठोर बनी हुई हैं।
भंडारी के अनुसार, RBI को दिसंबर के लिए इंतजार करने की बजाय अक्टूबर में ही ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला लेना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि यह दर वृद्धि वित्तीय प्रणाली से अतिरिक्त नकदी को सोखने के उपायों के साथ संयोजित की जानी चाहिए। इस दोहरी रणनीति से न केवल महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी बल्कि बाजार में स्थिरता भी आएगी।
वर्तमान समय में केंद्रीय बैंक को राजकोषीय और मौद्रिक दोनों मोर्चों पर संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। बाहरी व्यापार पर दबाव और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याओं के बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर निर्णय लेना अति आवश्यक हो गया है।