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चालू वित्त वर्ष के बाद अतिरिक्त तरलता बनी नहीं रहेगी: RBI
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि मुद्रा रिसाव और ओपन मार्केट ऑपरेशन्स के माध्यम से अतिरिक्त फंड को अवशोषित किया जाएगा। उन्होंने नकद रिज़र्व अनुपात में बढ़ोतरी को RBI के लिए कम पसंदीदा उपकरण करार दिया।
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भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वर्तमान बैंकिंग प्रणाली में विद्यमान अतिरिक्त तरलता संभवतः चालू वित्त वर्ष के पश्चात् बनी नहीं रहेगी। मल्होत्रा के अनुसार, मुद्रा बाजार से होने वाले रिसाव और केंद्रीय बैंक द्वारा संचालित ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMOs) इन अतिरिक्त निधियों को प्रभावी ढंग से अवशोषित करने का काम करेंगे।
RBI के प्रमुख ने तरलता प्रबंधन के संदर्भ में मौद्रिक नीति के विभिन्न साधनों की अलग-अलग प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से नकद रिज़र्व अनुपात (CRR) में वृद्धि को RBI के लिए सबसे कम पसंदीदा उपकरण बताया। यह रुख दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक तरलता नियंत्रण के लिए अन्य अधिक प्रभावी और लचीले तरीकों को वरीयता देता है।
अर्थव्यवस्था में तरलता की स्थिति RBI के मौद्रिक नीति निर्माण का एक महत्वपूर्ण पहलू रही है। मल्होत्रा की टिप्पणियां सुझाती हैं कि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में विद्यमान अतिरिक्त धनराशि को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करेगा ताकि बैंकिंग प्रणाली में स्वस्थ और संतुलित तरलता बनी रहे।